73वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला हुआ प्रारंभ
गौचर (चमोली), 15 नवंबर 2025-
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को 73वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का शुभारंभ किया।
विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गौचर मेला उत्तराखंड की प्रमुख सांस्कृतिक पहचानों में से एक है, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है।
सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और लोकल फॉर वोकल, मेड इन इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिल रहा है।
“मातृशक्ति के उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी पीछे छोड़ रहे” — सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद उत्तराखंड की महिला शक्ति अपने हुनर से ऐसे उत्पाद तैयार कर रही है, जो बड़ी कंपनियों को भी मात दे रहे हैं।
उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करता है।
उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड अब
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फिल्म शूटिंग का बेस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है
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वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है
गौचर को मिली बड़ी सौगात: 18-सीटर हेलीसेवा की घोषणा
मुख्यमंत्री धामी ने गौचर में पिथौरागढ़ की तर्ज पर 18-सीटर हेलीसेवा शुरू करने,
नगर क्षेत्र के चार प्रमुख स्थलों पर पार्किंग सुविधाओं के विकास,
और साकेत नगर–रघुनाथ मंदिर–चटवापीपल मोटर मार्ग निर्माण की घोषणा की।
उन्होंने यह भी बताया कि
गौचर स्टेडियम निर्माण हेतु धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है
और जल्द ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
पत्रकार और शिक्षाविद को दिया गया सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दो विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया:
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वरिष्ठ पत्रकार हरीश मैखुरी – गोविंद प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान
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डॉ. नंद किशोर हटवाल (शिक्षाविद एवं साहित्यकार) – पंडित महेशानंद नौटियाल शिक्षा एवं साहित्य प्रसार सम्मान
क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल और मेला उपाध्यक्ष संदीप नेगी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय समस्याओं का मांगपत्र भी सौंपा।
सांस्कृतिक रंगों से महका पहला दिन
पहले दिन की प्रमुख गतिविधियाँ:
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ईष्ट रावल देवता की पूजा
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स्कूली बच्चों की प्रभात फेरी
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झंडारोहण व मार्चपास
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क्रॉस-कंट्री दौड़ (गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक)
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बालक–बालिका दौड़
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नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता
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शिशु प्रदर्शनी
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शिक्षण संस्थानों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम
रात्रि में लोक गायिका डॉ. पम्मी नवल द्वारा जागर संध्या प्रस्तुत की जाएगी।
पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति से सजा पांडाल आज भी मेले का मुख्य आकर्षण बना हुआ है।
