ऋषिकेश: चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदा पानी और ठोस कचरा गंगा नदी में जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बुधवार को चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का मौके पर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के उचित उपचार के लिए जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना देने के निर्देश दिए। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता और उत्तराखंड पेयजल निगम (निर्माण वृत्त–गंगा) के महाप्रबंधक ने नाले का पूरा नक्शा और प्रस्तावित कार्ययोजना प्रस्तुत की।
जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी हालत में दूषित पानी गंगा में न जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का पानी स्वच्छ और उपचारित होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे वह किसी भी विभाग का प्रतिष्ठान हो या कोई आवासीय भवन—यदि गंदा पानी गंगा में बहाया गया तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान उन्होंने नाले में गंदा पानी छोड़ रहे 25 घरों के पाइप और ड्रेन्स को उसी दिन सील करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने इस समस्या को बहुत गंभीर बताते हुए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने के लिए तुरंत प्रस्ताव तैयार करने और बिना उपचारित गंदे पानी को रोकने के लिए प्राथमिकता से काम करने को कहा। उन्होंने बताया कि गंगा की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, ताकि प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान हो सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को स्वच्छ रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क अधिकांश इलाकों में है, लेकिन जहां काम चल रहा है या जहां प्रतिष्ठानों और घरों के कनेक्शन अभी सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं, वहां गंदे पानी के उपचार के लिए प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरसेप्शन और ड्रेनेज प्लान के तहत एसटीपी के विस्तार की योजना बनाई जा रही है। जो भी प्रतिष्ठान या आवासीय भवन बिना उपचारित पानी सीधे बहा रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र के वार्ड-3 में गलियों में पैदल चलकर घरों और प्रतिष्ठानों की सीवरेज व्यवस्था तथा बह रही नालियों का निरीक्षण किया और नालियों को सीवरेज से जोड़ने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, पेयजल निगम, जल संस्थान और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद इसे आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा।
सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने जानकारी दी कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत ढालवाला–मुनिकीरेती योजना के तहत बनाया गया है। सीमित भूमि उपलब्ध होने के कारण यह एसटीपी बहुमंजिला रूप में बनाया गया है, जो देश में अपनी तरह का पहला एसटीपी है। यह अक्टूबर 2020 से अनुरक्षण में है।
यह 7.50 एमएलडी एसटीपी तीन नालों के शोधन के लिए बनाया गया है, जिनमें श्मशान घाट नाला और चन्द्रेश्वर नगर नाला प्रमुख हैं। ढालवाला नाले में सीवेज के साथ प्राकृतिक स्रोतों का पानी भी बड़ी मात्रा में आता है। बरसात के मौसम में ढालवाला नाले का प्रवाह एसटीपी की क्षमता से अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में श्मशान घाट और चन्द्रेश्वर नगर नाले का पूरा सीवेज एसटीपी में उपचारित किया जाता है, जबकि ढालवाला नाले का पानी क्षमता के अनुसार ही लिया जाता है।
मानसून और उसके बाद लगभग चार महीनों तक ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक रहने के कारण जल गुणवत्ता जांच में प्रदूषण की मात्रा बहुत कम पाई जाती है। ढालवाला नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे और परिवारों का सर्वे किया जा रहा है। शुरुआती सर्वे में 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में और 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में जा रहा है। सर्वे का काम जारी है और सभी आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। सीधे बह रहे पानी के नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
