• Dehradun
  • February 22, 2026
0 Comments

देहरादून | 5 जून 2025 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में एक भव्य समारोह में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड की शपथ भी दिलाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

सुंदरलाल बहुगुणा पुरस्कार का हुआ वितरण
पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘सुंदरलाल बहुगुणा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार – 2025’ का वितरण दो श्रेणियों में किया गया।

सरकारी श्रेणी में यह पुरस्कार नगर निगम रूद्रपुर को प्रदान किया गया। निगम की ओर से उप नगर आयुक्त श्रीमती शिप्रा जोशी ने पुरस्कार प्राप्त किया।

गैर-सरकारी श्रेणी में यह सम्मान श्री विजय जड़धारी और श्री प्रताप सिंह पोखरियाल को प्रदान किया गया।

नई पहलें और जागरूकता कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तैयार किए गए जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया और इको टूरिज्म कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित एक नए पोर्टल का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने हेतु कपड़े के थैले वितरित किए गए।

वन विभाग को मिले निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने वन विभाग को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक वन प्रभाग में कम से कम 1,000 फलदार वृक्षों का रोपण किया जाए, जिससे वन्य जीवों को पर्याप्त आहार मिल सके। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधरोपण करें।

उत्तराखंड: जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड घने जंगलों, पवित्र नदियों और हिमालयी ग्लेशियरों के साथ जैव विविधता से भरपूर राज्य है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अक्षय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत, नमामि गंगे और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे अभियानों ने पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार लोकपर्व हरेला को एक महापर्व के रूप में मना रही है और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु स्प्रिंग एंड रिवर रीजुविनेशन अथॉरिटी (SARA) का गठन किया गया है।

सफल जल संरक्षण प्रयास
बीते वर्ष राज्य में लगभग 6,500 जल स्रोतों का संरक्षण व उपचार किया गया और 3.12 मिलियन घन मीटर वर्षा जल का संचयन किया गया। चारधाम यात्रा समेत प्रदेश में आने वाले वाहनों में कूड़ेदान अनिवार्य कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय खेलों को ग्रीन गेम्स की थीम पर आयोजित किया गया, जिसमें सभी मेडल ई-वेस्ट से और खेल किट रिसाइकल्ड सामग्री से बनाए गए थे।

Author

uttarakhandinsight18@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *