देहरादून- मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सहस्त्रधारा रोड स्थित एक होटल में आयोजित ‘उत्तराखंड अनन्य सम्मान कार्यक्रम’ में प्रतिभाग कर शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने शहीदों की वीरता को नमन करते हुए कहा कि उनका बलिदान राष्ट्र के लिए सर्वोच्च प्रेरणा है, और उनके परिवारों की पीड़ा, साहस और देशप्रेम हम सभी के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है, जहाँ लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना या अर्धसैनिक बलों से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वे स्वयं एक फौजी के बेटे हैं, इसलिए उनके मन में शहीदों और उनके परिजनों के प्रति स्वाभाविक रूप से गहरी संवेदनशीलता और सम्मान की भावना है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है, ताकि शहीद परिवारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त धनराशि और वार्षिक सम्मान राशि में भी व्यापक वृद्धि की गई है, जिससे सैनिकों के योगदान का उचित सम्मान सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया है तथा नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर पाँच वर्ष कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में बलिदानियों के आश्रितों के लिए नौकरी पूर्व प्रशिक्षण और पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई है तथा सेवारत और पूर्व सैनिकों के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट उपलब्ध कराई गई है। पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को भी अचल संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प शुल्क में समान छूट प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देहरादून के गुनियाल गाँव में भव्य सैन्य धाम का निर्माण करा रही है, जो प्रत्येक उत्तराखंडी के लिए गौरव और श्रद्धा का स्थल होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सेना को अत्याधुनिक संसाधनों से सशक्त कर रहा है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। भारत आज विश्व के उन प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है जो रक्षा उपकरणों का निर्यात करते हैं, यह देश और उत्तराखंड के वीर सपूतों का भी गर्व बढ़ाता है।
