देहरादून, 04 दिसंबर 2025। राजधानी देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और शहर को सुगम एवं सुरक्षित कनेक्टिविटी देने के लिए प्रस्तावित रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड रोड तथा एनएच-7 आशारोड़ी–झाझरा परियोजना को लेकर जिला प्रशासन ने कार्यवाही तेज कर दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर औपचारिकताएं पूरी करते हुए कार्यों में तेजी लाएं।
जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। उन्होंने नगर निगम और एमडीडीए को निर्देश दिया कि परियोजना में प्रस्तावित भूमि का रिकॉर्ड शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, एलिवेटेड कॉरिडोर सर्वेक्षण समिति को विभागवार प्रभावित भूमि का विस्तृत विवरण तैयार करने को कहा गया। लोनिवि और राजस्व अधिकारियों को स्थल पर तैनात रहते हुए सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का पूरा ब्यौरा निर्धारित प्रारूप में तैयार करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि विभागवार भूमि रिकॉर्ड तैयार होते ही धारा–11 के अंतर्गत प्रारंभिक अधिसूचना जारी की जाए और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए, ताकि परियोजना में अनावश्यक विलंब न हो।
आशारोड़ी–झाझरा एनएच-7 परियोजना में ग्रामीणों के अवरोध और वन विभाग की भूमि के प्रतिकर भुगतान जैसी समस्याओं पर जिलाधिकारी ने एनएच अधिकारियों को एसडीएम सदर और विकासनगर के साथ संयुक्त निरीक्षण कर समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने देहरादून–हरिद्वार रोड पर सुधार कार्यों में तेजी लाने और अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए पुलिस और संबंधित एसडीएम के साथ समन्वय बनाकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में लोनिवि द्वारा प्रस्तुत प्रेज़ेंटेशन में बताया गया कि एलिवेटेड परियोजना का अलाइनमेंट तैयार कर एनएचएआई को भेजा जा चुका है, जिसकी स्वीकृति के बाद अगला चरण शुरू होगा।
रिस्पना एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई 10.365 किमी है जिसमें कुल 49.04 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। इसमें 42.89 हेक्टेयर सरकारी, 4.01 हेक्टेयर निजी तथा 2.1 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। कुल 1022 संरचनाएं प्रभावित क्षेत्र में आती हैं।
वहीं बिंदाल कॉरिडोर की लंबाई 14.264 किमी है, जिसमें कुल 55.90 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी—31.07 हेक्टेयर सरकारी, 15.67 हेक्टेयर निजी, 2.22 हेक्टेयर वन और 6.92 हेक्टेयर रक्षा संपदा की भूमि शामिल है। इसमें कुल 1656 संरचनाएं प्रभावित हैं।
