देहरादून, 18 जनवरी 2026- मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित राज्य का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) अब केवल सामाजिक पुनर्वास का ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक शोध और सामाजिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। भिक्षावृत्ति, बालश्रम और कूड़ा बीनने जैसी परिस्थितियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों के मानसिक पुनर्गठन (माइंड रिफॉर्मेशन) के साथ उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
शैक्षणिक शोध का केंद्र बन रहा ICC
देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राएं इंटेंसिव केयर सेंटर का भ्रमण कर यहां न केवल शोध कार्य कर रहे हैं, बल्कि बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। इसी क्रम में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र यादव के नेतृत्व में केंद्र का भ्रमण किया और बच्चों से संवाद स्थापित किया।
बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास में वृद्धि
इस अवसर पर ICC में रह रहे बच्चों ने स्वयं के हाथों से बनाए गए स्वागत कार्ड और सुंदर स्वागत नृत्य के माध्यम से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। इस सहभागिता से बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास, प्रस्तुति कौशल और टीमवर्क के सकारात्मक विकास की स्पष्ट झलक देखने को मिली। यह पहल समाज और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवेदनशील और सशक्त साझेदारी का उदाहरण बन रही है।
सामाजिक पुनर्वास की दिशा में नई पहल
माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। यहां रेस्क्यू किए गए बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। सड़कों पर बिखरे बचपन से भिक्षा का कटोरा छीनकर शिक्षा की कलम सौंपने का यह मानवीय प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहा है।
267 बच्चों का रेस्क्यू, 154 शिक्षा से जुड़े
जिला प्रशासन द्वारा शनिवार को भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए 27 बच्चों को इंटेंसिव केयर सेंटर से विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया। अब तक भिक्षावृत्ति, बालश्रम और कूड़ा बीनने में संलिप्त कुल 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
दिसंबर 2024 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को रखा गया, जिनमें 83 बच्चे भिक्षावृत्ति, 117 बच्चे कूड़ा बीनने और 67 बच्चे बालश्रम से रेस्क्यू किए गए हैं।
आधुनिक सुविधाओं से मानसिक सशक्तिकरण
बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए इंटेंसिव केयर सेंटर में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां पढ़ाई के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, व्यायाम, मनोरंजन और काउंसलिंग की समुचित व्यवस्था की गई है। बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब सुविधा भी प्रदान की गई है।
इस पूरे कार्यक्रम की जिलाधिकारी द्वारा नियमित और व्यक्तिगत मॉनिटरिंग की जा रही है। मानसिक रूप से सशक्त किए जाने के बाद 154 बच्चों का चरणबद्ध तरीके से विभिन्न सरकारी विद्यालयों में प्रवेश कराया गया है।
“शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है”
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा,
“शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि “भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन तक निरंतर जारी रहेगा। रुकना कोई विकल्प नहीं है।”
