• Dehradun
  • February 11, 2026
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नाचनी बाजार में 12 लाख रुपये का कारोबार, काश्तकारों को मिला बेहतर दाम

नाचनी (पिथौरागढ़)।
बागेश्वर जिले की महरगाड़ घाटी का रसीला और मीठा संतरा अब पिथौरागढ़ जिले में भी अपनी खास पहचान बना रहा है। अधिक मांग के चलते महरगाड़ घाटी के काश्तकारों ने अब तक नाचनी बाजार में करीब 12 लाख रुपये के संतरे बेच दिए हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ थोक व्यापारियों में भी इन संतरों की जबरदस्त मांग देखी जा रही है।

ग्रेड के अनुसार तय हो रहे दाम

नाचनी बाजार में संतरे बेचने पहुंचे काश्तकार धरम सिंह कोश्यारी, बाजो सिंह कोश्यारी और लच्छम सिंह कोरंगा ने बताया कि संतरे का मूल्य उसके आकार और गुणवत्ता के आधार पर तय किया जा रहा है।

  • पहला ग्रेड: ₹130 प्रति दर्जन

  • दूसरा ग्रेड: ₹100 प्रति दर्जन

  • तीसरा ग्रेड: ₹80 प्रति दर्जन

उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ और थल क्षेत्र से थोक व्यापारी सीधे महरगाड़ घाटी के गांवों में पहुंचकर संतरे खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिल रहा है।

लाखों का कारोबार कर चुके काश्तकार

किसमिला गांव के काश्तकारों ने बताया कि अब तक

  • धरम सिंह ने लगभग ₹90 हजार,

  • लछम सिंह ने ₹60 हजार,

  • मंगल सिंह कोरंगा ने ₹55 हजार,

  • बाजो सिंह ने ₹50 हजार
    के संतरे बेच लिए हैं।

घाटी के 15 हजार से अधिक काश्तकारों ने मिलकर अब तक करीब 12 लाख रुपये का संतरा कारोबार किया है।

सिंचाई की कमी बनी चिंता

जहां एक ओर संतरे का अच्छा बाजार मिलने से काश्तकार खुश हैं, वहीं दूसरी ओर सिंचाई की सुविधा के अभाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
काश्तकार सुरेंद्र सिंह, चंद्र सिंह, भूपाल सिंह, जगत सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण संतरे के पेड़ दो-तीन साल फल देने के बाद सूखने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि उद्यान विभाग द्वारा आधुनिक ड्रिप सिंचाई तकनीक उपलब्ध कराई जाए तो न केवल उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि पेड़ों की उम्र भी लंबी होगी। काश्तकारों ने लंबे समय से लिफ्ट सिंचाई योजना की मांग भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

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uttarakhandinsight18@gmail.com

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