देहरादून | 16 दिसंबर 2025- मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे नियंत्रित करने के लिए और अधिक प्रभावी व ठोस प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।
संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भालू, गुलदार, बाघ एवं हाथी प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए।
सोलर फेंसिंग और बायो-फेंसिंग अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी-बी फेंसिंग, वॉच टावर एवं अन्य सुरक्षात्मक उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए नियमित जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (QRT) को निरंतर सक्रिय रखा जाए।
वन्यजीव कॉरिडोर संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य में हाथी एवं बाघ कॉरिडोर सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोरों के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। वन्यजीवों के आवागमन वाले मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास निर्माण की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
जिला स्तर पर हॉट-स्पॉट मैपिंग के निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वन्यजीव समन्वय समिति को सक्रिय रखने और संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों एवं ग्रामों की हॉट-स्पॉट मैपिंग तत्काल पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने पर भी जोर दिया।
कचरा प्रबंधन और ईको-टूरिज्म पर फोकस
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए ताकि भालू और अन्य वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित न हों।
उन्होंने कहा कि ईको-टूरिज्म को और सुदृढ़ करने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट के साथ-साथ वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं कंजरवेशन रिजर्व क्षेत्रों में भी योजनाबद्ध कार्य किए जाएं। टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिविजन में पशु चिकित्सकों की व्यवस्था पर भी बल दिया गया।
वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रस्तावों पर सहमति
बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित 9 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इनमें केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य की पेयजल योजनाएं, राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से जुड़ी मोटरमार्ग योजनाएं तथा रामनगर वन प्रभाग का ऑप्टिकल फाइबर प्रस्ताव शामिल है।
इसके अतिरिक्त संरक्षित क्षेत्रों की 10 किमी परिधि में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ भेजने का निर्णय लिया गया।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर मुआवजा बढ़ा
बैठक में जानकारी दी गई कि वन्यजीवों द्वारा मानव मृत्यु के मामलों में अनुग्रह राशि 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। 32 वन प्रभागों में त्वरित कार्रवाई के लिए 93 क्यूआरटी गठित की गई हैं। पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
वन मंत्री का बयान
वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम हैं, जिससे उत्तराखंड की वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत होगी।
