देहरादून, 6 नवम्बर —
उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास आज आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र बन गया, जब देशभर के प्रतिष्ठित संतों, महामंडलेश्वरों और आध्यात्मिक गुरुओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर राज्य की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और विकास कार्यों की सराहना की।
संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” बताते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वर महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज, जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी, और चिंतक डॉ. कुमार विश्वास सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी की सांस्कृतिक दृष्टि, धार्मिक स्थलों के संरक्षण और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली नीतियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने देवभूमि की आत्मा और सनातन विरासत को सशक्त नेतृत्व प्रदान किया है।
संतों ने यह भी संकल्प लिया कि हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए वे राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि कुम्भ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है, और इसे ऐतिहासिक स्वरूप देना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में संतों ने कहा कि उत्तराखंड आज तेजी से एक वैश्विक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों को जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए उत्तराखंड की उन्नति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद दिया।
