देहरादून। उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायतों में समय पर चुनाव न हो पाने की स्थिति में अब प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी अंतिम चरण में है। पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन के लिए लाया गया अध्यादेश राजभवन की स्वीकृति की प्रतीक्षा में है। शासन स्तर पर बुधवार देर रात तक इस पर मुहर लगने की उम्मीद बनी रही।
गौरतलब है कि प्रदेश की 7478 ग्राम पंचायतों में तैनात प्रशासकों का छह महीने का कार्यकाल बुधवार को समाप्त हो गया। ऐसे में गुरुवार से आगे के संचालन के लिए कार्यकाल विस्तार जरूरी हो गया है, अन्यथा पंचायतों में संवैधानिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
राज्य के 12 जिलों में, हरिद्वार को छोड़कर, पिछले वर्ष नवंबर के अंत में त्रिस्तरीय पंचायतों—ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों—का कार्यकाल पूरा हो गया था। चुनाव न हो पाने के चलते इन्हें प्रशासकों के हवाले कर दिया गया था।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 28 नवंबर 2023, क्षेत्र पंचायतों का 30 नवंबर और जिला पंचायतों का दो दिसंबर को समाप्त हुआ था। इसके बाद संबंधित पदाधिकारियों—ग्राम प्रधान, क्षेत्र प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष—को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया।
पंचायतीराज अधिनियम में यह स्पष्ट है कि प्रशासक केवल छह माह तक ही नियुक्त किए जा सकते हैं। अब जबकि यह अवधि ग्राम पंचायतों में समाप्त हो चुकी है और क्षेत्र व जिला पंचायतों में क्रमशः 30 मई और एक जून को समाप्त हो रही है, सरकार ने समय रहते अध्यादेश लाकर कार्यकाल को एक साल तक बढ़ाने का निर्णय लिया।
इस संशोधन अध्यादेश को सोमवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी, जिसके बाद मंगलवार को इसे राजभवन भेजा गया। बुधवार की रात तक इस पर राज्यपाल की स्वीकृति मिलने की प्रतीक्षा की जाती रही। वहीं सीएम धामी का कहना है कि राज्य सरकार पंचायत चुनावों के लिए तैयार है।
