• Dehradun
  • February 17, 2026
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देहरादून | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखंड की शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखंड ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उत्तराखंड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और विभिन्न परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति का प्रस्तुतीकरण किया।

त्रिवेणी घाट–नीलकंठ रोपवे को मिली अहम स्वीकृति

बैठक में बताया गया कि त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी/अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। निगम द्वारा स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस हेतु आवेदन भी किया जा चुका है। यह परियोजना श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने में सहायक होगी।

सचिव ने 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को भविष्य की परियोजनाओं में बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश आकर्षित किया जा सके।

हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पीआरटी सिस्टम

हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डीडीयू पार्किंग–चंडी देवी–मनसा देवी–मल्टीमॉडल हब) की डीएफसी कराए जाने पर चर्चा हुई। 18 फरवरी 2026 को डीएफसी प्रक्रिया की तिथि तय की गई।

हरिद्वार पीआरटी परियोजना के तहत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—

सीतापुर से भारत माता मंदिर

सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर

लालतारा चौक से भूपतवाला

गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल

इस योजना में 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं तथा कुल लंबाई 20.73 किमी होगी। तीर्थ सीजन के दौरान यातायात प्रबंधन में यह योजना क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

देहरादून में ई-बीआरटीएस: 31.52 किमी का मेगा कॉरिडोर

देहरादून में ई-बीआरटीएस परियोजना के अंतर्गत आईएसबीटी से रायपुर तक पहला कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसमें 35 स्टेशन और कुल लंबाई 31.52 किमी होगी। बैठक के बाद सचिव ने निगम अधिकारियों के साथ आईएसबीटी–मसूरी डायवर्जन कॉरिडोर का स्थलीय निरीक्षण भी किया।

उन्होंने कहा कि राजधानी की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

देहरादून पीआरटी के तीन कॉरिडोर

देहरादून में पीआरटी परियोजना के तहत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—

क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक

पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन

गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क

इन कॉरिडोरों को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल से जोड़ा जाएगा, ताकि शहरी विकास सुनियोजित ढंग से हो सके।

17 स्टेशनों का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण

बैठक के उपरांत आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन तक प्रस्तावित 17 स्टेशनों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन निर्माण हेतु 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई, जो मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है।

पार्किंग पॉलिसी और समन्वित विकास पर जोर

सचिव ने उत्तराखंड कार पार्किंग पॉलिसी-2022 के अनुसार सभी ट्रांजिट परियोजनाओं को समन्वित रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना पार्किंग प्रबंधन के कोई भी ट्रांजिट सिस्टम प्रभावी नहीं हो सकता।

शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को आधुनिक, सुरक्षित और सतत शहरी परिवहन व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। रोपवे, पीआरटी और ई-बीआरटीएस परियोजनाएं यातायात दबाव कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन संवर्धन में सहायक होंगी।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ आगे बढ़ाई जाएं तथा पीपीपी मॉडल को मजबूत किया जाए।

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uttarakhandinsight18@gmail.com

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