देहरादून | अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और सोशल मीडिया पर नाम सामने आए कथित वीआईपी नेताओं पर कार्रवाई की मांग को लेकर रविवार को देहरादून की सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री आवास कूच का आह्वान किया। हालांकि, पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को हाथीबड़कला क्षेत्र में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
पुलिस–प्रदर्शनकारी आमने-सामने
हाथीबड़कला पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प की स्थिति भी बनी। इसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में अंकिता को न्याय दिलाने और सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
परेड ग्राउंड से निकली विशाल रैली
रविवार सुबह करीब 11 बजे उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सीपीआई, बेरोजगार संघ, उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति, गढ़वाल सभा महिला मंच सहित कई सामाजिक संगठनों के लोग परेड ग्राउंड में एकत्र हुए। यहां से एक विशाल रैली निकालते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया गया, जिसे पुलिस ने हाथीबड़कला पर रोक दिया।
“नए आरोपों के बाद नई जांच जरूरी”
सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में सामने आए नए आरोपों के बाद इस पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना था कि अंकिता भंडारी की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि संरक्षण में पनपे एक आपराधिक तंत्र का परिणाम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी द्वारा कथित वीआईपी का नाम सामने लाए जाने के बावजूद सरकार इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।
विपक्ष का आरोप— “वीआईपी को बचाने की कोशिश”
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार शुरुआत से ही इस मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि जब तक पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच नहीं होती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकती। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष सामाजिक और जन संगठनों की आवाज को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।
11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने घोषणा की कि 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद रखा जाएगा। इसके लिए व्यापार संगठनों और अन्य सामाजिक संगठनों से संवाद किया जाएगा। उन्होंने सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए मांग की कि सभी आरोपित वीआईपी को जांच के दायरे में लाया जाए और उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं।
वहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि सरकार को शीघ्र सीबीआई जांच की संस्तुति करनी चाहिए।
सड़क पर बैठकर गीत, विरोध के अनोखे तरीके
मुख्यमंत्री आवास कूच से रोके जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठ गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने गीत गाकर भी विरोध जताया, जो काफी देर तक चलता रहा।
घड़ा फोड़कर जताया आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान युवाओं में खासा आक्रोश देखने को मिला। एक युवक अपने कंधे पर सरकार विरोधी नारों से लिखा घड़ा लेकर पहुंचा और हाथीबड़कला बैरिकेडिंग पर पहुंचकर उसने घड़ा फोड़कर विरोध दर्ज कराया।
