देहरादून, 2026। प्रधानमंत्री किसान उत्सव दिवस के अवसर पर हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट, देहरादून में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी किए जाने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल से देशभर के किसानों के लिए डीबीटी के माध्यम से जारी की गई किसान सम्मान निधि की राशि का वर्चुअल प्रसारण भी देखा।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, विधायक श्रीमती सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उत्तराखंड के 8 लाख किसानों को मिला लाभ
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त किसानों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से पहुंच रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस किस्त के तहत देशभर के लगभग 10 करोड़ किसानों के खातों में 18,880 करोड़ रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई है। वहीं उत्तराखंड के 8 लाख से अधिक किसानों को 159 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्राप्त हुई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में प्रदेश के लगभग 4 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित हो रहे थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 8 लाख से अधिक हो चुकी है। यह किसानों के सरकार पर बढ़ते विश्वास और योजनाओं की प्रभावी पहुंच का प्रमाण है।
किसान देश की खाद्य सुरक्षा के आधार स्तंभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार देश की सीमाओं की सुरक्षा जवान करते हैं, उसी प्रकार खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का कार्य किसान करते हैं। किसान केवल अन्न उत्पादन नहीं करता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसी पहलें किसानों को सशक्त बना रही हैं।
नहरों से सिंचाई पूरी तरह निशुल्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है। इसी क्रम में राज्य में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह निशुल्क करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य बजट में 200 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
आधुनिक पॉलीहाउस और क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव फार्मिंग को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 115 करोड़ रुपये की लागत से 350 से अधिक आधुनिक पॉलीहाउस विकसित किए जा चुके हैं, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त हो रही है।
उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती की चुनौतियों को देखते हुए 1000 करोड़ रुपये की लागत से “उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट” को मंजूरी दी गई है। इससे बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
नई कृषि नीतियों से मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने फल उत्पादन और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए नई सेब नीति, कीवी नीति, ड्रैगन फ्रूट नीति तथा स्टेट मिलेट मिशन लागू किया है। इन योजनाओं के तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए कोल्ड चेन, कोल्ड स्टोरेज, सीए स्टोरेज और मेगा फूड पार्क जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
महक क्रांति और हाउस ऑफ हिमालयाज से नई पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को सगंध खेती का अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से “महक क्रांति” नीति लागू की गई है। इसके तहत प्रदेश में 7 एरोमा वैली विकसित की जा रही हैं तथा 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और मिलेट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है।
किसानों की आय वृद्धि में उत्तराखंड प्रथम
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि स्पष्ट नीति, ईमानदार नीयत और प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप उत्तराखंड ने किसानों की आय वृद्धि के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की मेहनत और सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित कर रही है कि उनका लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।
अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए विकसित उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनने की अपील की।
