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  • October 10, 2026
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नई दिल्ली। नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के खिलाफ सोमवार से शुरू हुआ युवाओं का आंदोलन देखते-देखते हिंसक हो उठा और हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत कई मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। संसद, सुप्रीम कोर्ट और नेताओं के घरों तक में आगजनी हुई। हालांकि, बुधवार तक सेना की तैनाती के बाद हालात काबू में लाने की कोशिशें शुरू हो गईं।

इन प्रदर्शनों ने नेपाल की राजनीति में नए चेहरों को केंद्र में ला दिया है। आंदोलन के सूत्रधार और भविष्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले नामों में सुदन गुरुंग, बालेन शाह, रबि लमिछाने और सुशीला कार्की सबसे प्रमुख माने जा रहे हैं।

1. सुदन गुरुंग: युवाओं की आवाज़

  • 2015 के भूकंप के दौरान हमि नेपाल एनजीओ की स्थापना की।

  • कोरोना काल में राहत कार्यों के कारण पहचान बनी।

  • 2020 के इनफ इज इनफ आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के नेता बने।

  • सोशल मीडिया पर स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की।

  • पुलिस की सख्ती के बाद सीधे पीएम ओली से इस्तीफे की मांग कर सुर्खियों में आए।

2. बालेंद्र (बालेन) शाह: इंजीनियर-रैपर से मेयर और नेता

  • काठमांडू के 15वें मेयर, 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता।

  • पेशे से इंजीनियर और रैप आर्टिस्ट; युवाओं के बीच लोकप्रियता सोशल मीडिया से पाई।

  • भारत के कर्नाटक में वीटीयू से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर किया।

  • 2023 में टाइम मैगजीन की “उभरते नेताओं” की सूची में शामिल।

  • जेनरेशन ज़ेड के आंदोलन का समर्थन करते हुए राजनीतिक दलों को आंदोलन से दूर रहने की अपील की।

  • ओली से लंबे समय से टकराव, भ्रष्टाचार विरोधी छवि के कारण युवाओं की पहली पसंद।

3. रबि लमिछाने: पत्रकार से राजनीति तक

  • टीवी शो सीधा कुरा जनता संग से लोकप्रियता हासिल की।

  • 2022 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) बनाई और 20 सीटें जीतवाईं।

  • उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने, लेकिन सहकारी फंड घोटाले में जेल गए।

  • युवाओं के समर्थन से जेल से बाहर निकले और आंदोलन का बड़ा चेहरा बने।

  • उनकी पार्टी ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए सामूहिक इस्तीफे दिए।

4. सुशीला कार्की: सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस

  • 1952 में विराटनगर में जन्म, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्टग्रेजुएशन।

  • नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर वकालत और न्यायपालिका में प्रवेश।

  • सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की।

  • युवाओं के प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए खुद सड़कों पर उतरीं।

  • सरकार की कार्रवाई को “हत्या” बताया और युवाओं ने उन्हें अंतरिम नेतृत्व सौंपने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया।

भारत को लेकर इन नेताओं का रुख

  • सुदन गुरुंग और बालेन शाह भारत की शिक्षा और सहायता से जुड़े रहे हैं, लेकिन नेपाल की संप्रभुता को प्राथमिकता देते हैं।

  • रबि लमिछाने भ्रष्टाचार और पारदर्शिता को मुद्दा बनाते हैं, भारत के साथ रिश्तों पर संतुलित रुख रखते हैं।

  • सुशीला कार्की का भारत से गहरा शैक्षिक रिश्ता है और वे लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा आधार मानती हैं।

नेपाल का यह आंदोलन न सिर्फ युवाओं की राजनीतिक शक्ति को सामने लाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में देश की सत्ता और नीतियां इन्हीं नए चेहरों और जनआंदोलनों से तय होंगी।

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uttarakhandinsight18@gmail.com

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