उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार ने परीक्षा ड्यूटी में लापरवाही और पेपर लीक प्रकरण में संलिप्तता पाए जाने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट, असिस्टेंट प्रोफेसर, दरोगा और सिपाही को निलंबित कर दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद शासन और पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
सेक्टर मजिस्ट्रेट निलंबित
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण हरिद्वार में परियोजना निदेशक पद पर तैनात केएन तिवारी, जिन्हें सेक्टर मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, निलंबित कर दिए गए। हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पन्ने मोबाइल से खींचकर बाहर भेजे गए थे। प्रारंभिक जांच में तिवारी की पर्यवेक्षण ड्यूटी में गंभीर लापरवाही सामने आई। उन्हें ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय पौड़ी से संबद्ध किया गया है।
असिस्टेंट प्रोफेसर सॉल्वर के रूप में पकड़ी गईं
राजकीय महाविद्यालय अगरोड़ा (टिहरी) में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भी निलंबित कर उच्च शिक्षा निदेशालय हल्द्वानी संबद्ध किया गया है। जांच में पाया गया कि वर्ष 2018 से ही सुमन पेपर बाहर भेजने वाले आरोपी खालिद के संपर्क में थी और प्रश्नपत्र हल करने (सॉल्वर) की भूमिका में रही। सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक साजिश में उसकी संलिप्तता पुख्ता हुई।
पुलिसकर्मी भी निलंबित
हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने परीक्षा केंद्र में ड्यूटी पर तैनात दरोगा रोहित कुमार और सिपाही ब्रह्मदत्त जोशी को भी निलंबित कर दिया है। इसी केंद्र से आरोपी खालिद ने पेपर के तीन पन्ने बाहर भेजे थे। मामले की जांच सीओ रुड़की नरेंद्र पंत को सौंपी गई है, जिन्हें एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अब तक मुख्य आरोपी खालिद और उसकी बहन साबिया को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वर्तमान में एसआईटी पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।
