देहरादून-उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य की खेल मंत्री Rekha Arya ने जानकारी दी कि “एक जिला-एक खेल” नीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों के लिए एक-एक विशिष्ट खेल का चयन किया गया है।
देहरादून में आयोजित एक बैठक के बाद खेल मंत्री ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य राज्य की खेल प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि नीति के तहत हर जिले में चयनित खेल के अनुरूप आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें खेल अकादमियों की स्थापना, प्रशिक्षकों की नियुक्ति और खिलाड़ियों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है।
युवाओं को मिलेगा खेलों में करियर का अवसर
रेखा आर्या ने कहा कि यह नीति युवाओं को खेलों से जोड़ने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगी। सरकार का मानना है कि यदि खिलाड़ियों को अपने जिले में ही बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन मिलेंगे तो वे बड़े स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर खेलों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी आगे आने का मौका मिलेगा।
जिलों के लिए तय किए गए विशेष खेल
सरकार द्वारा विभिन्न जिलों के लिए विशेष खेलों का चयन किया गया है। अल्मोड़ा में बैडमिंटन, बागेश्वर में ताइक्वांडो और चंपावत में फुटबॉल को प्राथमिकता दी गई है।
देहरादून जिले को शूटिंग का केंद्र बनाया जाएगा, जबकि हरिद्वार में कुश्ती और नैनीताल में मॉर्डन पेंटाथलॉन को बढ़ावा दिया जाएगा। पौड़ी गढ़वाल में एथलेटिक्स और पिथौरागढ़ में मुक्केबाजी के लिए विशेष सुविधाएं विकसित होंगी।
इसी तरह टिहरी गढ़वाल में कैनोइंग और कयाकिंग, रुद्रप्रयाग में वुशू, ऊधमसिंह नगर में साइकिलिंग तथा उत्तरकाशी में कबड्डी को विशेष खेल के रूप में विकसित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह नीति आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में मददगार साबित होगी।
