देहरादून | 19 नवंबर 2025- भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में प्रभावी संवाद, सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था, जिम्मेदार मीडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे अहम स्तंभ बताया गया। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित विचार-विमर्श में प्रशासन, मीडिया, शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र के विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि नीतियों के साथ-साथ उनका सटीक और समयबद्ध संप्रेषण भी उतना ही आवश्यक है।
सम्मेलन का दूसरा दिन विचारों के आदान-प्रदान, अनुभवों की साझेदारी और भविष्य की रणनीतियों को तय करने का प्रभावी मंच बना। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी को मजबूती देने में जनसंचार की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक निर्णायक होगी।
पहला सत्र: स्वास्थ्य, विज्ञान और सूचना पर फोकस
दूसरे दिन के पहले सत्र में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव मुख्यमंत्री एवं महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, तथा यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने अपने विचार साझा किए। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार संजीव कंडवाल ने किया।
स्वास्थ्य व्यवस्था और डिजिटल हेल्थ
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लिए सुलभ और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली अनिवार्य है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ सेवाओं ने दूरस्थ क्षेत्रों तक विशेषज्ञ चिकित्सा पहुंचाना संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।
सुशासन में प्रभावी संचार की भूमिका
अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने कहा कि सुशासन की सफलता पारदर्शी, संवेदनशील और प्रभावी संचार पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के 25 वर्षों की विकास यात्रा में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयाँ मिली हैं।
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चारधाम यात्रा में इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालु
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आदि कैलास, जागेश्वर धाम, कैंची धाम और मानसखंड मंदिरमाला का विकास
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प्रतिवर्ष 7–8 करोड़ पर्यटक उत्तराखंड पहुंच रहे हैं
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में रिवर्स माइग्रेशन, युवाओं के लिए 35 से अधिक स्वरोजगार नीतियां, प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
विज्ञान और नवाचार
यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार विकसित भारत की आधारशिला हैं। उन्होंने विज्ञान संचार के माध्यम से शोध को समाज से जोड़ने पर जोर दिया।
