Uttarakhand Government
  • Dehradun
  • October 6, 2026
0 Comments

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों के साथ अनौपचारिक संवाद किया। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, खासकर दूरस्थ और पर्वतीय इलाकों से पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने अपने क्षेत्रों की विकास संबंधी जरूरतें, समस्याएं और अपेक्षाएं रखीं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का यथासंभव जल्द समाधान करने के निर्देश दिए।

सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड के प्रत्येक वर्ग, क्षेत्र और समाज के हर व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार समेकित और समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ काम कर रही है और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए SC-ST समुदाय के लोगों के साथ संवाद हुआ है। ऐसे संवादों के जरिए स्थानीय समस्याएं सीधे सरकार के सामने आती हैं और उनके समाधान की दिशा में प्रयास किए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए सरकार और जनता के बीच सीधा और निरंतर संवाद जरूरी है। इसी उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता के बीच संवाद को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि स्थानीय समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके।

समान अवसर और सामाजिक सशक्तिकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान के जरिए दिए गए समानता, सामाजिक न्याय और समान अवसर के संदेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार इसी भावना के साथ समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि विकास का लाभ किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित एवं कमजोर वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बजट में भी दूरस्थ क्षेत्रों के विकास और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए प्रावधान किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।

दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर जमीनी स्थिति समझने का दावा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पिछले करीब पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी समेत राज्य के पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के सैकड़ों दौरे किए हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास मुख्यमंत्री के रूप में केवल देहरादून तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों और सीमांत क्षेत्रों में जाकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझने तथा लोगों से सीधे संवाद करने का रहा है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों से सीधे मिलकर उनकी समस्याओं को समझने से सरकार की प्राथमिकताओं को जमीनी जरूरतों से जोड़ने में मदद मिलती है। इससे क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में भी सहायता मिलती है।

डॉ. आंबेडकर से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और योगदान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष, विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए काम किया जा रहा है। आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के जरिए जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति, लोककला, लोकगीत, हस्तशिल्प और जीवनशैली को मंच दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के साथ दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में भी ऐसे आयोजनों का विस्तार किया जा रहा है। हाल में चंपावत में आयोजित आदि गौरव महोत्सव का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके अनुसार जनजातीय संस्कृति उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार इसके संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ST समुदाय के लिए इन योजनाओं का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अनुसूचित जनजाति समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, बिजली, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार भी SC-ST समुदाय के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रही है।

महिलाओं और पारंपरिक शिल्पकारों को बाजार से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों और शिल्प की देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग कर रही है। बिना ब्याज ऋण जैसी सुविधाओं के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक शिल्पकार सांस्कृतिक विरासत के वाहक हैं। उनके हुनर को बाजार, आधुनिक डिजाइन, प्रशिक्षण और बेहतर मार्केटिंग से जोड़कर आय बढ़ाई जा सकती है। सरकार स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को ‘लोकल से ग्लोबल’ पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, स्वरोजगार और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि होमस्टे जैसी योजनाओं से पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोग अपनी स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को आजीविका से जोड़कर आत्मनिर्भर बनें।

मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में अन्य लोगों को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी दें और पात्र लोगों को उनका लाभ लेने के लिए प्रेरित करें।

लोगों ने सड़क, शिक्षा और रोजगार समेत कई समस्याएं रखीं

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए SC-ST समुदाय के लोगों ने सड़क, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, आजीविका, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं।

मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति विकास की दौड़ में पीछे न रहे और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी राज्य के अन्य हिस्सों के समान अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास, जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तराखंड को सशक्त, समावेशी और विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप समेत अन्य अधिकारी और राज्य के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Author

uttarakhandinsight18@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *