• Dehradun
  • May 10, 2026
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पौड़ी गढ़वाल- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से बढ़ते पलायन और खाली होते गांवों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। अपने पैतृक गांव पंचूर में आयोजित श्री विष्णु पंचदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि पलायन केवल खेतों को उजाड़ नहीं रहा, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और पूर्वजों से जुड़ी पहचान को भी कमजोर कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आज कई गांवों में खेत बंजर पड़े हैं और जो भूमि कभी हरियाली से भरी रहती थी, वहां अब झाड़ियां दिखाई देती हैं। कई स्थानों पर खेती पूरी तरह बंद हो चुकी है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोग खेती छोड़ने के लिए जंगली जानवरों को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन पहले भी पहाड़ों में वन्य जीव मौजूद थे। उस समय लोग खेती और परंपराओं से अधिक जुड़े रहते थे तथा सामूहिक रूप से गांवों की जिम्मेदारी निभाते थे।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों और किसानों से पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि गेहूं, धान और दाल जैसी फसलें सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं तो लोगों को फलोत्पादन और बागवानी की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंचूर के पास स्थित पोखरी गांव में Baba Ramdev द्वारा खुमानी, आड़ू और किन्नू जैसी फसलों का सफल उत्पादन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को नई दिशा मिल रही है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांवों और खेतों को फिर से आबाद करना समय की मांग है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों और ग्रामीणों को हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि जब खेत फिर से हरे-भरे होंगे, तभी गांवों की आत्मा और सांस्कृतिक अस्तित्व भी सुरक्षित रह पाएगा।

मंदिर निर्माण से जुड़ा प्रसंग भी किया साझा

कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने विष्णु पंचदेव मंदिर निर्माण से जुड़ा एक रोचक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर आज मंदिर बना है, वहां पहले सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, लेकिन बार-बार जेसीबी मशीनों के खराब होने से काम रुक रहा था।

उन्होंने कहा कि बाद में पुराने नक्शों और स्थानीय इतिहास की जानकारी से पता चला कि वह स्थान पहले एक देवस्थल था, जहां ग्रामीण पूजा-अर्चना किया करते थे। इसके बाद सड़क की दिशा बदलने का निर्णय लिया गया और मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जैसे ही निर्माण कार्य की दिशा बदली गई और मंदिर निर्माण शुरू हुआ, उसके बाद न तो कोई मशीन खराब हुई और न ही निर्माण कार्य में कोई बाधा आई। उन्होंने इसे आस्था और दैवीय शक्तियों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि समाज को अपनी परंपराओं और देवस्थलों के संरक्षण के प्रति सजग रहना चाहिए।

“गांवों से खत्म हो रही जागर की परंपरा”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बचपन में गांवों में हर वर्ष जागर का आयोजन होता था, लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं की आराधना और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने के लिए जागर जैसी लोक परंपराओं का संरक्षण जरूरी है।

उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार रात पंचूर गांव में आयोजित जागर कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें वर्षों पुरानी आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। साथ ही उन्होंने नृसिंह भगवान के प्राचीन मंदिर के पुनर्निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां लगातार होती रहनी चाहिए।

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uttarakhandinsight18@gmail.com

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